उन्नाव
उम्मीद दर्पण
मंजू ,
परिवार नियोजन लाभार्थी, उन्नाव
झलक | स्वास्थ्य के लिए सही निर्णय ने किया भविष्य सुरक्षित
उन्नाव ज़िले के बिछिया ब्लॉक के कु रारी कला गाँ व में रहने वाली 22 वर्षीय मंजू की कहानी, किशोरावस्था में हुए विवाह और सीमित जानकारी के कारण परिवार
नियोजन में आने वाली चुनौतियों को उजागर करती है। 16 वर्ष की उम्र में पृथ्वी पाल से विवाह के बाद, मात्र चार साल में वह दो बच्चों की माँ बन चुकी थी। पृथ्वी
पाल मज़दूरी करते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति कमज़ोर है।
अप्रैल 2024 में दूसरे बच्चे के जन्म के बाद गाँ व की आशा मिथिलेश ने मंजू को परिवार नियोजन अपनाने की सलाह दी, लेकिन मंजू ने यह कहते हुए मना कर दिया
कि उसका पति बाहर काम करता है और गर्भनिरोध की ज़रूरत नहीं है। उसी साल वह दो बार गर्भवती हुई और दोनों बार गर्भपात कराना पड़ा। दो अन्य बार उसे
आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियाँ लेनी पड़ीं। बार-बार हुए इन अनचाहे गर्भधारणों ने उसे शारीरिक रूप से कमज़ोर और मानसिक रूप से थका दिया।
फरवरी 2025 में मिथिलेश के दोबारा समझाने पर मंजू ने परिवार नियोजन की बात गंभीरता से ली। मिथिलेश ने उसे परिवार नियोजन साधनों के बारे में बताया और
उपकें द्र चलने को प्रेरित किया। मार्च 2025 में मंजू मिथिलेश के साथ बिछिया उपकें द्र पहुँची, जहाँ सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) रूबी ने उसे सभी अंतराल
और स्थायी विधियों की विस्तृत जानकारी दी। CHO रूबी द्वारा परामर्श मिलने से मंजू का आत्मविश्वास बढ़ा और उसने सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र बिछिया पर जा कर
अंतरा की पहली खुराक ली।
अब मुझे सुकू न है कि मैंने सही फै सला लिया। परिवार नियोजन
अपनाकर मैं निश्चिंत हूँ और अपनी सेहत व बच्चों पर ध्यान दे पा रही हूँ।
- मंजू
विशेष | परिवार नियोजन में पुरुषों की ज़िम्मेदारी
एवम् सहभागिता महत्वपूर्ण
डा. हरिनन्दन प्रसाद, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी
रिप्रोडक्टिव ऐंड चाइल्ड हेल्थ (RCH) एवं जनपदीय
नोडल अधिकारी परिवार नियोजन, उन्नाव
परिवार नियोजन के वल
जनसंख्या नियंत्रण का माध्यम
नहीं, बल्कि हर परिवार के बेहतर
स्वास्थ्य और भविष्य की कुं जी है। इसे
पुरुषों और महिलाओं की साझा
जिम्मेदारी के रूप में दे खना आवश्यक
है। उन्नाव के अपर मुख्य चिकित्सा
अधिकारी के रूप में मेरा मानना है कि
यदि पुरुष सक्रिय रूप से परिवार
नियोजन अपनाएँ , तो हम सुरक्षित
मातृत्व, स्वस्थ परिवार और संतुलित
जनसंख्या की दिशा में बड़ा कदम उठा
सकते हैं।
आज भी परिवार नियोजन के साधनों का उपयोग अधिकतर महिलाएँ ही करती हैं, जबकि पुरुषों
की भागीदारी सीमित है। बच्चे के जन्म और पालन-पोषण का भार महिलाओं पर होता है, इसलिए
यह उनका अधिकार है कि वे तय करें कब, कितने व कितने अंतराल पर बच्चे हों। पुरुषों की
जिम्मेदारी है कि वे इस निर्णय में अपनी पत्नी का सहयोग करें - चाहे भावनात्मक समर्थन दे कर या
स्वयं परिवार नियोजन विधि अपनाकर।
विशेष | साझा प्रयासों से बढ़ेगी परिवार नियोजन
पर जन जागरूकता
परिवार नियोजन के वल स्वास्थ्य विभाग की ही ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह ऐसा क्षेत्र है जहाँ कई
विभाग मिलकर काम करें तो परिणाम अधिक प्रभावी और स्थायी हो सकते हैं ।
महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनवाड़ी कें द्रों और किशोर-किशोरी समूहों के माध्यम से महिलाओं को
परिवार नियोजन, जन्म अंतराल, सुरक्षित मातृत्व और पोषण के महत्व पर जागरूक कर सकता है तथा
सेवाओं के प्रचार और वितरण में सहयोग दे सकता है।
पंचायती राज विभाग, ग्राम पंचायत स्तर पर परिवार नियोजन को चर्चा का विषय बनाकर, ग्राम स्वास्थ्य
एवं पोषण दिवस (VHND) के दौरान इसकी सेवाएँ उपलब्ध करा सकता है। ग्राम प्रधान ग्राम स्वास्थ,
स्वच्छता एवं पोषण समिति के फं ड का उपयोग गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए कर सकते हैं और
आशा-ए.एन.एम.को परिवार नियोजन पर सक्रिय रूप से काम करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। ग्राम
सभाओं के माध्यम से पुरुष सहभागिता को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
युवा एवं खेल विभाग और नेहरू युवा कें द्र युवाओं में सकारात्मक सोच
विकसित कर उन्हें परिवार नियोजन के लिए परिवर्तन के वाहक बना
सकते हैं। युवा चैंपियंस के माध्यम से युवाओं को जोड़कर प्रेरित किया
जा सकता है, ताकि वे पुरुष भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए परिवर्तन
के वाहक बनें और समाज को नई दिशा प्रदान करें ।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएँ अपने समुदाय में,
समाज में प्रचलित कु रीतियों जैसे बाल विवाह, बेटे की चाह जैसी
कु रीतियों के खिलाफ जागरूकता फै लाकर लिंग समानता और बच्चों के
बीच उचित अंतराल पर चर्चा को प्रोत्साहित कर सकती हैं।
डॉ संतोष कु मार श्रीवास्तव,
खण्ड विकास अधिकारी, उन्नाव
कं डोम का नियमित प्रयोग या नसबंदी जैसे उपाय पुरुषों की जिम्मेदारी साझा करने के प्रभावी
साधन हैं। जब पुरुष सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो न के वल दांपत्य संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि
परिवार और समाज दोनों अधिक स्वस्थ और खुशहाल बनते हैं।
इस प्रकार सभी विभाग साझा दृष्टिकोण से आगे बढ़कर परिवार नियोजन का लाभ समाज के हर
वर्ग तक पहुँचा सकते हैं।
रिपोर्ट |परिवार नियोजन में पुरुषों की भूमिका पर ज़ोर
पुरुषों की परिवार नियोजन में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्दे श्य से पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया द्वारा
‘उम्मीद परियोजना’ के तहत 25 सितंबर 2025 को उन्नाव ज़िले के पुरवा ब्लॉक के मिर्रीखेड़ा गांव में एक विशेष बैठक
आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में लगभग 50 पुरुष और महिलाएँ उपस्थित रहे। बैठक के दौरान पुरुषों को परिवार
नियोजन की विभिन्न विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई और उन्हें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ
ही, बाल विवाह, बच्चों में सही अंतराल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जागरूकता फै लायी गई।
बैठक में मोबाइल वैन का उपयोग कर परिवार नियोजन पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई, ऑडियो जिंगल प्रस्तुत किए
गए और हैंडबिल वितरित किए गए। वहीं, वैन में उपस्थित प्रशिक्षित काउं सलर ने लाभार्थियों को परिवार नियोजन के साधन
भी उपलब्ध कराए।
मिर्रीखेड़ा गांव में पुरुषों को परिवार नियोजन की विभिन्न विधियों के बारे में
विस्तार से जानकारी दी गई और उन्हें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया
इस बैठक में ग्राम प्रधान श्रीमती कान्ति दे वी, प्रधान प्रतिनिधि श्री जगभान सिंह, ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर इशहाक
अली, ए.एन.एम., आशा संगिनी और आशा कार्यकर्ता सहित मीडिया प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। ग्राम प्रधान ने पुरुषों से
अपील की कि वे परिवार नियोजन अपनाकर अपने परिवार का आकार सीमित रखें और खुशहाल जीवन सुनिश्चित करें ।
रचना|परिवार नियोजन: स्वस्थ्य जीवन की राह
छोटा परिवार, सुखी परिवार,
स्वस्थ जीवन का यही आधार।
अस्थायी उपाय हैं आसान सहारा,
कं डोम, गोली, कॉपर-टी प्यारा।
ज़रूरत के अनुसार इन्हें अपनाएँ ,
सुरक्षित रहकर मुस्कान फै लाएँ ।
स्थायी उपाय, जब मन हो अटल,
नसबंदी से भविष्य होगा सफल।
जीवन होगा निश्चिंत और हल्का,
सपनों का आँ गन होगा दमका।
आशा बहन घर-घर जाएँ ,
ज्ञान और परामर्श सब तक पहुँचाएँ ।
माँ -बच्चे की सेहत सँभाले,
हर परिवार को जागरूक बनाएं ।
स्वास्थ्य विभाग निभाता योगदान,
लाता है नित नए अभियान।
जागरूकता से बढ़े विश्वास,
हर आँ गन में खिले विकास।
इशहाक अली,
ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसेस
मैनेजर, नवाबगंज, उन्नाव
रचना|नहीं जनूँगी लाल
आधा दर्जन बच्चे तेरे , एक चौथाई लाल,
रो कर बच्चे रोटी मांगे और वो मांगे दाल ।
सुन कर मम्मी सोच में डूबी, कै से कटेंगें साल ?
हाय रे दइया का करू मैं फं दा है ये जाल।
गर्भ निरोधक गोली खाऊँ , या कॉपर टी का इस्तेमाल,
या नसबंदी करा लूँ जल्दी, हो जाये ख़तम बवाल।
एक दो बच्चे घर में रहते, घर होता खुशहाल,
रबड़ी मलाई जी भर कर खाते, रहते मालामाल।
रे बाबा अब और नहीं जनूँगी लाल
रे बाबा अब और नहीं जनूँगी लाल
श्रीमती, आशा,
नवाबगंज,
उन्नाव