Newsletter_Umeed Darpan_Umeed Project_PFI _2025 December

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छोटे परिवार की बड़ी खुशियां
उमीद दर्पण
पहला संस्करण
मोबियस फाउं डेशन टीम का सीतापुर दौरा एवं
‘इतनी भी क्या जल्दी है’ अभियान का शुभारंभ
ब्लॉक समन्वय समिति की बैठक के दौरान परिवार नियोजन पर पोस्टर्स का अनावरण
डॉ राम बूझ, एडवाइज़र, मोबियस फाउं डे शन ने उम्मीद टीम के साथ 29 सितंबर
2025 को सीतापुर ज़िले का दौरा किया। टीम ने खैराबाद में सहायक पंचायत
अधिकारी ओम प्रकाश सिंह और अधीक्षक खैराबाद डॉ राहिल फरीद की संयुक्त
अध्यक्षता में आयोजित ब्लॉक समन्वय समिति (BCC) की बैठक में भाग लिया,
जिसमें विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान सामाजिक
एवं व्यवहार परिवर्तन संचार अभियान ‘इतनी भी क्या जल्दी है’ का औपचारिक
शुभारं भ किया गया, जिसमें इस कै म्पेन के तहत बनाई गई फिल्मों, जिंगल्स और
पोस्टर्स का अनावरण किया गया। इसके पश्चात अभियान के अन्तर्गत चलाई जा
रही मोबाइल वैन को ओम प्रकाश सिंह और डॉ राहिल फरीद द्वारा हरी झंडी
दिखाकर रवाना किया गया, ताकि ग्रामीणों में व्यापक स्तर पर परिवार नियोजन
और बाल विवाह के प्रति जागरूकता फै लाई जा सके ।
अंत में, टीम ने अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO) डॉ. संजय श्रीवास्तव
के साथ बैठक की और सामुदायिक स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण के लिए चल रहे प्रयासों
तथा भविष्य की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया। यह चर्चा जनपद मे
उम्मीद परियोजना के कार्यान्वयन को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक
महत्वपूर्ण कदम रही।
इस कार्यक्रम में मोबियस फाउं डे शन टीम से आर्यन बैनर्जी (प्रोजेक्ट एसोसिएट)
व प्रभात कु मार (प्रोजेक्ट एसोसिएट) एवम् पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया
टीम से शिल्पा नायर (राज्य प्रमुख), बी.के .जैन (एसोसिएट लीड) व सविता
पांडे य (कन्सल्टन्ट,कपैसिटी बिल्डिंग) भी मौजूद रहे।
एक्ज़ीक्यूटिव
डायरेक्टर की
कलम से
मुझे आप सबके साथ “उम्मीद दर्पण” का पहला संस्करण प्रस्तुत करते हुए गर्व और सम्मान का अनुभव हो रहा है। ‘उम्मीद
परियोजना’ उत्तर प्रदे श सरकार के साथ पॉपुलेशन फ़ाउं डे शन ऑफ़ इं डिया का एक साझा प्रयास है, जिसका उद्दे श्य प्रजनन
स्वास्थ्य परिणामों व राज्य के जनसंख्या स्थिरीकरण लक्ष्यों को बेहतर करने में सहयोग दे ना है।
उम्मीद परियोजना उत्तर प्रदे श के सात उच्च प्रजनन दर वाले जनपदों के 6,000 से अधिक गाँ वों में वर्ष 2024 से चलाई जा रही
है। पिछले वर्ष हमने 12,700 से अधिक फ्रं टलाइन वर्क र्स- आशा, ए.एन.एम. और परामर्शदाताओं को प्रशिक्षित कर उनका
क्षमतावर्धन किया है जिससे वे गुणवत्तापूर्ण परिवार नियोजन सेवाएँ प्रदान कर सकें । परियोजना के अंतर्गत अब तक 93 से
अधिक परिवार नियोजन परामर्श कें द्रों को विभिन्न स्वास्थ्य इकाइयों में शुरू किया गया है, जिनमे अब तक 56,000 से अधिक
लाभार्थियों को सही जानकारी, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और गर्भनिरोधक साधनों के विकल्प उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इनमें से
82% लाभार्थियों ने परिवार नियोजन की किसी न किसी विधि को अपनाया है।
हमारे सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन संचार अभियान ‘इतनी भी क्या जल्दी है!!?’ ने लगभग 1,70,000 सामुदायिक सदस्यों
और सरकारी कर्मचारियों तक अपनी पहुँच बनाई है। इस अभियान ने फिल्म्स , जिंगल्स और रील्स जैसे ऑडियो-विज़ुअल सामग्री
से युक्त मोबाइल वैनों के माध्यम से समुदाय में सार्थक संवाद की शुरुआत की—चाहे वह बच्चों में उचित अंतराल की समझ हो,
विवाह की सही उम्र का संदे श हो , प्रथम गर्भधारण में दे री का महत्व हो या पुरुष सहभागिता को बढ़ावा दे ना। इस पूरी पहल में
आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। हमें यह साझा करते हुए बेहद खुशी है कि ‘इतनी भी क्या जल्दी है!!?’
अभियान को 200 प्रविष्टियों में से चयनित किया गया और नवंबर 2025 में इसे बोगोटा, कोलंबिया में आयोजित प्रतिष्ठित
‘अंतर्राष्ट्रीय परिवार नियोजन सम्मेलन’ में प्रदर्शित होने का गौरव प्राप्त हुआ।
इस न्यूज़लेटर मे प्रकाशित सरकारी अधिकारियों के संदे श व स्वास्थ्य सेवाप्रादाताओं और लाभार्थियों के अनुभव, परियोजना के
उल्लेखनीय प्रभाव को दर्शाते हैं। मैं आशा करती हूँ कि यह संस्करण, न के वल उम्मीद परियोजना के अंतर्गत आने वाले जनपदों में
बल्कि उत्तर प्रदे श के अन्य जनपदों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी परियोजना के बेहतर प्रसार और विस्तार के लिए एक उपयोगी
संसाधन सिद्ध होगा।
मैं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदे शालय, ज़िलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों, मुख्य
चिकित्साधिकारियों तथा ज़िले और ब्लॉक स्तरीय नोडल अधिकारियों सहित राज्य सरकार के सभी अधिकारियों का, उनके
सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करती हूँ। साथ ही साथ स्वास्थ्यकर्मियों, आशाओं, ए.एन.एम., पंचायतराज
संस्थाओं के सदस्यों और समुदाय के प्रतिनिधियों का भी उनकी प्रतिबद्धता और निरं तर प्रयासों के लिए विशेष रूप से धन्यवाद दे ती
हूँ । इन सभी के पूर्ण सहयोग के बिना हमारा सफल होना संभव नहीं हो पाता।
पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया मोबियस फाउं डे शन द्वारा दिए जा रहे सहयोग के लिए हृदय से आभारी है। राज्य सरकार के
नेतृत्व और सहयोग से ही इस परियोजना की सफलता संभव है।
पूनम मुत्तरेजा
एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर,
पॉपुलेशन फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया

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उम्मीद परामर्श कें द्र, फखरपुर, बहराइच
बहराइच
उम्मीद दर्पण
रिपोर्ट | फखरपुर CHC बना परिवार नियोजन परामर्श का सशक्त मॉडल
स्वास्थ्य सेवाओं में अक्सर छोटी-सी शुरुआत बड़े बदलाव लाती है, और सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र (CHC) फखरपुर, बहराइच में बने उम्मीद परामर्श
कें द्र की कहानी इसका प्रमाण है। पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इंडिया की टीम ने जब वर्ष 2024 में CHC फखरपुर का आकलन किया तो पाया कि
यहाँ परिवार नियोजन परामर्श के लिए प्रशिक्षित काउं सलर या कोई व्यवस्थित कक्ष उपलब्ध नहीं था।
इस जरूरत को महसूस करते हुए, पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इंडिया ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी बहराइच के नेतृत्व में जनपद स्तर पर दो-दिवसीय
काउं सलर प्रशिक्षण आयोजित किया, जिसमें CHC फखरपुर से भी तीन स्टाफ नर्सों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण के बाद फरवरी 2025 में यहाँ
उम्मीद परामर्श कें द्र स्थापित हुआ, जो मार्च 2025 में पूरी तरह से कार्यशील हो गया। उम्मीद परामर्श कें द्र के बनने से, CHC फखरपुर पर आने वाले
सभी लाभार्थियों को गोपनीय और सहज माहौल में परिवार नियोजन परामर्श मिलना शुरू हो गया है। सेवा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए स्टाफ
का ड्यूटी रोस्टर भी जारी किया गया है।
मार्च 2025 से 20 अगस्त 2025, यानि मात्र छः महीने मे ही कु ल 592 लाभार्थियों ने परामर्श सेवाओं का लाभ लिया, जिनमें से 104 ने परिवार
नियोजन के तरीके अपनाए है। इस सफलता में स्टाफ नर्स सुश्री रंजीता त्रिपाठी का योगदान अहम रहा, जिसके लिए उन्हें 23 जुलाई 2025 को "स्टार
काउं सलर ऑफ़ द मंथ" सम्मान से नवाज़ा गया। उनका समर्पण और प्रयास फखरपुर CHC को परिवार नियोजन सेवाओं का एक सशक्त मॉडल
बनाने में अहम साबित हो रहा है।
डॉ. संजय कु मार, मुख्य
चिकित्साधिकारी, बहराइच
विशेष|बहराइच जनपद में परिवार नियोजन सेवाओं की गुणवत्ता
सुधार हेतु उम्मीद परियोजना का विस्तार
बहराइच जनपद के जरवल सहित 8 अन्य ब्लॉकों में उम्मीद परियोजना का संचालन मोबियस फाउं डे शन
के वित्तीय सहयोग से पापुलेशन फाउं डे शन ऑफ़ इं डिया द्वारा किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत
सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र स्तर पर परिवार नियोजन परामर्श कें द्र स्थापित किए गए हैं, आशा/ए.एन.एम.
को प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी क्षमता में वृद्धि की गई है, एवं समुदाय में सामाजिक व्यवहार परिवर्तन
अभियान चलाया जा रहा है, इससे परिवार नियोजन सेवाओं की मांग बढी है और काउं सलिंग सेवाओं में
अभूतपूर्व सुधार आया है।
इसके दृष्टिगत, मेरे द्वारा बहराइच के शेष 5 ब्लॉक - महसी, रिसिया, नवाबगंज, चित्तौरा एवं हुजूरपुर में
काउं सलिंग कार्नर खोले जाने और इन 5 ब्लॉकों की सभी आशाओं और ए.एन.एम. को फ्लिप बुक और
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) को फॅ मिली प्लैनिंग किट प्रदान किए जाने के संबंध में अनुरोध
किया गया था। इस संदर्भ में, अक्टूबर माह में पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया द्वारा सभी 5 ब्लॉकों के
चिकित्सा अधीक्षकों और ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर (BCPM) के साथ एक कार्यशाला आयोजित
की जा चुकी है और इसी क्रम में आगे सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों को जॉब एड् स प्रदान किए जाने
प्रस्तावित हैं। मैं पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया एवं मोबियस फाउं डे शन के योगदान की सराहना करता
हूँ, की उन्होंने मेरी अनुशंसा पर उम्मीद परियोजना को, जो प्रारं भ में बहराइच जिले के 9 ब्लॉकों में
संचालित थी, विस्तार दे कर सभी 14 ब्लॉकों में चलाए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
इससे अब जनपद के सभी ब्लॉक में परिवार नियोजन की गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ सुनिश्चित किया जाना संभव
हो पाएगा।
मोबाइल वैन शो देखते हुए थारू जनजाति समुदाय के सदस्य
रिपोर्ट|बहराइच के सीमांत थारु जनजाति के इलाक़े में पहुँचा
परिवार नियोजन जागरूकता अभियान
जनपद बहराइच के मिहीपुरवा ब्लॉक के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य कें द्र अंबा के गाँ व विशुनापुर और बर्दिया
में 23 सितंबर 2025 को समेकित बाल विकास परियोजना (ICDS) द्वारा सेवा संतृप्तीकरण अभियान –
पोषण माह के तहत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ
इं डिया ने परिवार नियोजन स्टॉल लगाकर समुदाय को परामर्श और सेवाएँ प्रदान कीं।
यह दुर्गम क्षेत्र नेपाल सीमा से सटा हुआ और थारू जनजाति बहुल है, जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोज़गार
और मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण गरीबी, पिछड़ापन और परिवार नियोजन
सेवाओं की अपूरित मांग बनी हुई है।
उम्मीद परियोजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मोबाइल वैन के माध्यम से बाल विवाह, शिक्षा,
परिवार नियोजन और किशोर स्वास्थ्य पर आधारित जिंगल्स, फिल्म्स, रील्स, पैम्फलेट् स और पोस्टर्स के
ज़रिए लगभग 250 लोगों को जागरूक किया गया। परामर्श के उपरांत 55 लाभार्थियों को परिवार
नियोजन और अन्य स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गईं ।
कार्यक्रम में माननीय सांसद श्री आनंद कु मार गोंड, पूर्व सांसद श्री अक्षयवार लाल गोंड, विधायक
मिहीपुरवा, MLC डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी श्री मुके श चंद्र (IAS), SDM, BDO, खंड
शिक्षा अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी (ICDS) उपस्थित रहे। अतिथियों ने मोबाइल वैन और
परिवार नियोजन पर आधारित संचार सामग्री का अवलोकन किया तथा बाल विवाह, शिक्षा और ईजी पिल्स
जैसे विषयों पर पोस्टर्स का अनावरण किया।
यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और डिजिटल सुरक्षा जागरूकता सत्र की झलकी
रिपोर्ट|विद्यालयों में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर अभिमुखीकरण
सत्र आयोजित
अगस्त 2025 में पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया ने बहराइच के जरवल ब्लॉक के पाँ च विद्यालयों —
फातिमा गर्ल्स इं टर कॉलेज, जय जवान जय किसान इं टर कॉलेज, ठाकु र भगवती सिंह किसना इं टर
कॉलेज, गवर्नमेंट गर्ल्स इं टर कॉलेज और आरपीएस मॉडर्न पब्लिक इं टर कॉलेज — में डिजिटल
जागरूकता और स्वास्थ्य शिक्षा पर अभिमुखीकरण सत्र आयोजित किए। इस पहल का उद्दे श्य किशोरों
और युवाओं को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य (SRH) और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी सही जानकारी प्रदान
करना था।
आज के समय में किशोर और युवा सोशल मीडिया और इं टरनेट पर अत्यधिक सक्रिय हैं और पढ़ाई,
समाचार तथा व्यक्तिगत स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी के लिए इन्हीं स्रोतों पर निर्भर रहते हैं। दुर्भाग्यवश,
इनमें से कई जानकारियाँ अप्रमाणित होती हैं, जिससे भ्रम और गलतफहमियाँ पैदा होती हैं। साथ ही,
ऑनलाइन गोपनीयता और साइबर सुरक्षा की अनदे खी से वे जोखिम में आ जाते हैं।
सत्र के दौरान छात्रों को पॉपुलेशन फाउं डे शन द्वारा विकसित SnehAI चैटबॉट के बारे में बताया गया —
जो फे सबुक मैसेंजर, व्हाट् सऐप और वॉयसबॉट पर उपलब्ध एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। यहाँ छात्र
बिना झिझक या डर के यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्न पूछ सकते हैं और प्रमाणिक जानकारी प्राप्त
कर सकते हैं।
इन कार्यक्रमों में कु ल 460 छात्रों ने भाग लिया। छात्रों की सक्रिय भागीदारी और उत्साह से स्पष्ट हुआ कि
SnehAI जैसी पहल युवाओं को सही दिशा और सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर अग्रसर कर रही है।

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विनोदिनी परिवार नियोजन कॉर्नर में दंपति को
परामर्श देती हुई
सीतापुर
उम्मीद दर्पण
झलक | संवाद से बदलाव: विनोदिनी की कहानी
मिलिए 40 वर्षीय काउं सलर विनोदिनी से, जिन्होंने सीतापुर ज़िले के सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र (CHC) सिधौली में परिवार नियोजन परामर्श की दिशा ही बदल
दी है। उन्होंने जून 2024 में उम्मीद परियोजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण में भाग लिया, जहाँ परिवार नियोजन की सभी विधियों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
इस प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास और काउं सलिंग कौशल दोनों मजबूत हुए। प्रशिक्षण के बाद विनोदिनी ने पति-पत्नी दोनों को साथ में परामर्श देने की नई
पहल शुरू की, जिससे परिवार नियोजन पर खुली बातचीत और दीर्घकालिक विधियों को अपनाने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।
प्रिया, 25 वर्षीय महिला, अपने पति के साथ जून 2025 में परामर्श के लिए स्वास्थ्य कें द्र पहुँची। विनोदिनी ने धैर्यपूर्वक उनकी बातें सुनीं, सभी विकल्पों की
जानकारी दी और हर विधि के फायदे बताए। दंपत्ति की जरूरतों को समझते हुए उन्होंने इंट्रायूटरीन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (IUCD) के बारे में विस्तारपूर्वक
समझाया व फॉलो-उप के बारे मे बताया। सही जानकारी मिलने के बाद प्रिया ने IUCD अपनाया और अब वह पूर्णतः संतुष्ट है।
विनोदिनी के प्रयासों का असर आँ कड़ों में भी दिखता है — जनवरी 2025 में उम्मीद परामर्श कें द्र शुरू होने के बाद हर माह 1,000 से अधिक लाभार्थियों को
परामर्श दिया गया, जिनमें लगभग 50% पुरुष शामिल रहे। जहाँ अप्रैल–जून 2024 के बीच 249 लाभार्थियों ने अंतरा, IUCD या नसबंदी अपनाई थी, वहीं
जनवरी–मार्च 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,056 तक पहुँच गई।
जब पति-पत्नी दोनों मिलकर निर्णय लेते हैं, तभी परिवार
नियोजन वास्तव में सफल होता है।
- विनोदिनी, काउं सलर
विशेष | विद्यालय प्रभारी की कलम से: उच्च शिक्षा हमारी
बेटियों के लिए सशक्तिकरण का सबसे बड़ा वरदान
डॉ. सुरेश कु मार
मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सीतापुर
बातचीत । उम्मीद परियोजना से सीतापुर में परिवार नियोजन को मिली नई गति
- डॉ. सुरे श कु मार
1. सीतापुर में परिवार नियोजन की क्या स्थिति है और इसको ले कर क्या चुनौतियाँ रही हैं?
सीतापुर का आधुनिक गर्भनिरोधक उपयोग दर के वल 30.6% है, जो लखनऊ मंडल के अन्य जिलों में सबसे कम है। यहाँ
परिवार नियोजन की अपूरित मांग (Unmet need) 18% है जो कि काफी अधिक है। लक्षित समूह में परिवार नियोजन
के प्रति जागरूकता और समझ की कमी मुख्य चुनौती है। इसके अलावा, सामाजिक और लैंगिक मान्यताएँ , जैसे जल्दी
शादी व नवदम्पत्ति पर जल्दी बच्चे करने का दवाब, बच्चों की संख्या, और परिवार नियोजन साधनों से जुड़े मिथक/भ्रांतियाँ
भी सेवाओं के उपयोग में बाधा डालते हैं।
2. उम्मीद परियोजना के सहयोग से इन चुनौतियों का समाधान किस हद तक हो पाया है?
उम्मीद परियोजना ने परिवार नियोजन सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया है। इसके तहत CHC
और PHC में स्थापित परिवार नियोजन परामर्श कें द्र (FPCC) महिलाओं और दंपत्तियों को गोपनीय, सम्मानजनक और
क्लाइं ट-कें द्रित परामर्श प्रदान कर रहे हैं। प्रशिक्षित काउं सलर हर क्लाइं ट को उचित विकल्प चुनने में मदद करते हैं। आशा
और ए.एन.एम. को प्रशिक्षण व जॉब एड् स मिलने से उनका ज्ञान और आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे वे समुदाय में बेहतर
परामर्श दे पा रही हैं। साथ ही, परियोजना ने ब्लॉक और जनपद स्तर पर समितियाँ बनाकर विभिन्न विभागों को परिवार
नियोजन के संयुक्त प्रयासों से जोड़ा है।
3. हाल ही में उम्मीद परियोजना के अंतर्गत ‘इतनी भी क्या जल्दी है’ नामक प्रचार प्रसार अभियान प्रारं भ हुआ है,
यह सीतापुर में किस तरह चलाया जा रहा है?
सीतापुर में उम्मीद परियोजना के तहत चल रहा ‘इतनी भी क्या जल्दी है’ अभियान सामाजिक व्यवहार परिवर्तन की दिशा में
एक प्रभावशाली पहल है। शॉर्ट फिल्म, जिंगल, पोस्टर और पैम्फ्लेट के ज़रिए बाल विवाह रोकने, विवाह की सही उम्र, समय
पर गर्भधारण और बच्चों में अंतर जैसे मुद्दों पर जनजागरूकता बढ़ाई जा रही है। विभिन्न विभागों के सहयोग से यह संदे श
गाँ व-गाँ व तक पहुँच रहा है। मोबाइल वीडियो वैन शो, क्विज़ और अन्य गतिविधियों से लोगों की रुचि और सहभागिता को
प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे समुदाय में सकारात्मक सोच और व्यवहार परिवर्तन को बल मिल रहा है।
शमीम फ़ातिमा,
विद्यालय प्रभारी, कॉम्पोज़िट विद्यालय, असडोर ब्लॉकखैराबाद ज़िला- सीतापुर
एक अध्यापिका के रूप में मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा महज़ एक
शैक्षणिक योग्यता ही नहीं, बल्कि स्वावलंबन और आत्म-निर्णय का मूल आधार है। शिक्षा से
हमारी बेटियाँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं तथा जीवन के हर क्षेत्र में स्वयं निर्णय लेने
की शक्ति अर्जित करती हैं। अपने करियर की दिशा, व्यक्तिगत स्वास्थ्य और भविष्य की
योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण चुनाव आत्मविश्वास के साथ स्वयं कर सकती हैं।
उच्च शिक्षा उन्हें इतना सक्षम बनाती है कि वे रूढ़ियों को तोड़ती हैं और अपने ज्ञान के बल पर
सामाजिक संवादों में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-
5) के आँ कड़े बताते हैं कि जिन महिलाओं ने कभी औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की है, उनके
जीवन में घरे लू/ इं टिमेट पार्टनर हिंसा (IPV) का अनुभव होने की संभावना उन महिलाओं की
तुलना में 4.5 गुना अधिक होती है, जिन्होंने 12 वर्ष से अधिक की शिक्षा पूरी की है। अतः
जल्दी विवाह करने के बजाय लड़कियों को शिक्षित कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना
कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। यह हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है कि हम मिलकर एक ऐसा
सामाजिक वातावरण बनाएँ जहाँ कोई भी लड़की उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित न रहे।
रिपोर्ट | ‘इतनी भी क्या
जल्दी है’ अभियान के
तहत खैराबाद ब्लॉक के
असोडर गाँ व में समुदाय
के साथ हुआ मोबाइल
वैन कार्यक्रम
परिवार नियोजन सेवाओं को दूर दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुचाने के लिए उम्मीद परियोजना के अंतर्गत सीतापुर के
खैराबाद ब्लॉक में मोबाइल वैन कार्यक्रम का आयोजन 29 सितंबर, 2025 को असोडर गाँ व के कम्पोज़िट गवर्नमेंट स्कू ल
में किया गया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन संचार अभियान ‘इतनी भी क्या जल्दी है’ के तहत
बनाई गई फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। समुदाय के 90 से अधिक लोगों ने इन फिल्मों को दे खा। फिल्म प्रदर्शन के दौरान
क्विज़ के माध्यम से सवाल-जवाब किए गए और सही उत्तर दे ने वालों को पुरस्कृ त भी किया गया। वैन में मौजूद
परामर्शदाता द्वारा 24 लाभार्थियों को परामर्श दिया गया व 21 लोगों को परिवार नियोजन साधन वितरित किए गए।
कार्यक्रम में लंबी अवधि से परिवार नियोजन साधन को अपनाने वाले 3 लाभार्थियों को भी टीम द्वारा सम्मानित किया गया।
टीम ने ग्राम प्रधान, स्कू ल प्राचार्य, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) और लाभार्थियों से संवाद स्थापित किया और
समुदाय की प्रतिक्रिया तथा कार्यक्रम के प्रभाव को समझा।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से मोबियस फाउं डे शन से डॉ. राम बूझ (एडवाइज़र), आर्यन बनर्जी (प्रोजेक्ट एसोसिएट), प्रभात
(प्रोजेक्ट एसोसिएट) और पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया से शिल्पा नायर (राज्य प्रमुख), बी.के . जैन (एसोसिएट
लीड) एवं सविता पांडे य (कन्सल्टन्ट, कपैसिटी बिल्डिंग) मौजूद रहे।
डॉ आनंद कु मार सिंह
अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र,
सिधौली,सीतापुर
विशेष | बेहतर समन्वय से संभव हुईं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं
सिधौली ब्लॉक का सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र, सीतापुर ज़िले के सबसे व्यस्त कें द्रों में से है,
जहाँ हर महीने करीब 300 प्रसव और रोज़ाना 350 मरीज़ आते हैं। उच्च क्लाइं ट लोड के
चलते चुनौती के वल सभी को परिवार नियोजन सेवाएँ दे ना ही नहीं, बल्कि उनके नियमित
फॉलोअप को सुनिश्चित करना भी थी। इस समस्या के समाधान के लिए मोबीयस फाउं डे शन
व पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया के सहयोग से एक समर्पित परिवार नियोजन परामर्श
कें द्र (FPCC) स्थापित किया गया।
यहाँ प्रत्येक लाभार्थी का विवरण रजिस्टर में दर्ज किया जाता है और यह जानकारी क्लस्टर
मीटिंग्स में संबद्ध आशा व ए.एन.एम. से साझा की जाती है। इससे परामर्श के बाद आशा
कार्यकर्ता लाभार्थियों से लगातार संपर्क में रहती हैं और आवश्यकतानुसार सेवाएँ व सामग्री
उपलब्ध कराती हैं। इस सुव्यवस्थित सूचना प्रणाली ने फॉलोअप की कमी से होने वाले
ड्रॉपआउट को काफी कम किया है, जो यह दर्शाता है कि सही रणनीति और समन्वय से
व्यस्त कें द्रों पर भी गुणवत्तापूर्ण परिवार नियोजन सेवाएँ और निरं तर दे खभाल संभव है।

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बाराबंकी
उम्मीद दर्पण
शैल कु मारी,
आशा, भिलवल गाँव, बाराबंकी
झलक|गाँ व से अंतर्राष्ट्रीय मंच तक: आशा बहू शैल कु मारी की प्रेरक यात्रा
बाराबंकी ज़िले के त्रिवेदीगंज ब्लॉक के भिलवल गाँ व की शैल कु मारी लगभग दो दशकों से आशा के रूप में कार्यरत हैं। मात्र 14 वर्ष की उम्र में विवाह होने के
बावजूद उन्होंने पति के सहयोग से पढ़ाई जारी रखी, हाई स्कू ल और स्नातक पूरा किया, 2006 में आशा भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण की और बाद में ए.एन.एम. कोर्स भी
किया।
उम्मीद परियोजना से जुड़ने से पहले शैल कु मारी को परिवार नियोजन विधियों की सीमित जानकारी थी। परियोजना के तहत हुए प्रशिक्षण में उन्होंने आधुनिक
गर्भनिरोधक तरीकों, संभावित दुष्प्रभावों और मिस्ड डोज़ की स्थिति में परामर्श दे ने की तकनीक सीखी। इस प्रशिक्षण ने उनमें आत्मविश्वास भरा कि वे महिलाओं
की शंकाएँ दूर कर सही मार्गदर्शन दे सकें ।
जनवरी से अगस्त 2025 के बीच उन्होंने छाया और अंतरा के 10-10 नए लाभार्थी जोड़े और 17 महिलाओं को पोस्टपार्टम IUCD लगवाया। जहाँ पहले महिलाएँ
विधियाँ अपनाने से हिचकती थीं, अब वे उनसे सलाह लेने आने लगी हैं।
उनके उत्कृ ष्ट कार्य के लिए जून 2025 में उन्हें ज़िले के डीएम द्वारा ‘बेस्ट परफॉर्मिंग आशा’ सम्मान मिला और नई दिल्ली में इं टरनेशनल कॉन्फ्रें स ऑन
सस्टेनेबिलिटी एजुके शन 2025 में पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया।
अब मुझमें इतना आत्मविश्वास आ गया है कि अगर मौका मिला, तो मैं ए.एन.एम. की नौकरी करना चाहूँगी।
- शैल कु मारी
विशेष |परिवार नियोजन प्रशिक्षण से आशा/ए.एन.एम. की क्षमता और सेवाओं में सुधार
मैं अनुपमा श्रीवास्तव, पिछले 10 वर्षों से ब्लॉक दे वा, बाराबंकी में ब्लॉक
कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर (BCPM) के रूप में कार्यरत हूँ। अब तक परिवार
नियोजन पर कोई विशेष प्रशिक्षण न होने के कारण आशा और ए.एन.एम. के साथ
चर्चाएँ प्रायः क्लस्टर मीटिंग के दौरान काफी संक्षिप्त व नसबंदी तक सीमित रहती
थीं। मुझे हमेशा लगता था कि यदि नई विधियों और परामर्श तकनीकों पर गहराई
से जानकारी मिले, तो इन चर्चाओं को अधिक सार्थक बनाया जा सकता है।
विशेष | कम उम्र में गर्भ धारण : माँ
और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए खतरा
यह अवसर तब मिला जब पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया द्वारा चलाए जा रहे
उम्मीद परियोजना के अंतर्गत मुझे मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण के लिए नामित
किया। इस प्रशिक्षण ने परिवार नियोजन की आधुनिक विधियों—अंतरा, छाया,
PPIUCD आदि—और परामर्श कौशल पर मेरी समझ को नया आयाम दिया।
अनुपमा श्रीवास्तव
ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर,
ब्लॉक देवा, बाराबंकी
प्रशिक्षण के बाद जब मैंने आशा और ए.एन.एम. को प्रशिक्षित किया, तो उनके
व्यवहार और दृष्टिकोण में स्पष्ट परिवर्तन दिखाई दिया।
अब आशाएँ समुदाय में परिवार नियोजन पर खुलकर संवाद करती हैं और
लाभार्थियों को गर्भधारण की शुरुआत से ही उपयुक्त विधियों के बारे में बताती हैं।
इन प्रयासों से अप्रैल–जुलाई 2025 के दौरान आधुनिक साधनों के उपयोग में
पिछले वर्ष की तुलना में 30% से अधिक वृद्धि हुई है। मुझे विश्वास है कि यह
बदलाव परिवार नियोजन कार्यक्रम में स्थायी सुधार लाएगा।
रिपोर्ट | देवा में छात्राओं के लिए यौन स्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम
राजकीय बालिका इं टर कॉलेज, दे वा में 25 सितम्बर 2025 को पॉपुलेशन
फाउं डे शन ऑफ़ इं डिया के तत्वावधान में किशोरियों के लिए यौन स्वास्थ्य
और डिजिटल सुरक्षा पर ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह
आयोजन 11 जुलाई 2025 को हुई उम्मीद परियोजना के अंतर्गत गठित
‘डिस्ट्रि क्ट वर्किंग ग्रुप’ की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुपालन में सम्पन्न
हुआ।
डॉ मंजु शुक्ला
लेडी मेडिकल ऑफिसर (LMO) देवा, बाराबंकी
हर लड़की का सपना होता है कि वह पढ़े -लिखे, आगे बढ़े और एक स्वस्थ
व खुशहाल जीवन जिए। लेकिन कम उम्र में होने वाली शादी उसके पूरे
जीवन को प्रभावित कर सकती है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण
(NFHS-5) के अनुसार, बाराबंकी में हर चार में से एक लड़की की शादी
18 वर्ष से पहले हो जाती है और लगभग 61 प्रतिशत महिलाएँ एनीमिक
हैं। शरीर पूरी तरह विकसित न होने के कारण कम उम्र में गर्भधारण
जोखिम भरा होता है। जल्दी व बार-बार गर्भधारण होने से गंभीर समस्याएं
—जैसे गर्भपात का खतरा, समय से पहले प्रसव, बच्चा कम वज़न का
होना, आदि की संभावना बढ़ जाती है।
जल्दी शादी से लड़कियों की पढ़ाई अधूरी रह जाती है और आत्मनिर्भर
बनने का अवसर भी खो जाता है। अगर विवाह कम से कम 21 वर्ष की
आयु के बाद हो, तो वे अपनी शिक्षा पूरी कर सुरक्षित मातृत्व का अनुभव
कर सकती हैं। स्वस्थ माँ से स्वस्थ बच्चा जन्म लेता है, और परिवार
खुशहाल रहता है।
कार्यक्रम में कक्षा 9 से 12 तक की 170 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग
लिया। उन्हें यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, शादी की सही आयु, साइबर सुरक्षा
और ऑनलाइन खतरों जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई। इसके
साथ ही पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ़ इं डिया द्वारा निर्मित स्नेहा ए.आई.
चैटबॉट और वॉइसबॉट के उपयोग से जुड़ी जानकारी साझा की गई।
इसी संदे श को पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया अपने अभियान ‘इतनी
भी क्या जल्दी है’ के माध्यम से फिल्मों और मनोरं जक गतिविधियों द्वारा
समुदाय तक पहुँचा रहा है — ताकि हर लड़की को अपने सपनों और
सेहत दोनों को संवारने का मौका मिल सके ।
सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र की राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यकर्म (RKSK) टीम ने माहवारी के दौरान स्वच्छता और पोषण संबंधी मुद्दों पर छात्राओं को जागरूक किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. सुविद्या वत्स ने कहा, “इस
प्रकार की कार्यशालाएँ प्रत्येक विद्यालय में आयोजित की जानी चाहिए, ताकि छात्राएँ सही जानकारी प्राप्त कर जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों को समझदारी से ले सकें ।” यह सत्र न के वल डिजिटल सुरक्षा और स्वास्थ्य शिक्षा
के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला रहा, बल्कि छात्राओं को तकनीकी नवाचारों से जोड़ने की दिशा में भी एक अहम कदम साबित हुआ।
इस अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र से अंकिता त्रिपाठी (ब्लॉक कोऑर्डिनेटर), डॉ. जावेद अहमद (मेडिकल ऑफिसर), शैलेन्द्र सिंह व माधवी (RKSK टीम), सहित विद्यालय की अध्यापिकाएँ एवं पॉपुलेशन फाउं डे शन
ऑफ़ इं डिया से तेजविन्दर सिंह, सौविक बंदोपाध्याय, जुबैर अंसारी व मनका सिंह उपस्थित रहे।
रचना | नए युग की नई सोच
उठो युवाओं चेत जाओ, अब आया नया ज़माना है,
नए युग की सोच के संग, भारत को समृद्ध बनाना है।
बेटियाँ नहीं अब किसी पर बोझ, घर घर यही बताना है,
पढ़ा-लिखा कर इनको भी अब आत्म निर्भर बनाना है।
बाल विवाह-एक अभिशाप है, इसको नहीं अपनाना है,
नन्ही सी उम्र में बच्चों का जीवन, बोझ नहीं बनाना है।
शादी तभी जब उम्र हो सही, परिवार को समझाना है,
समझदारी का निर्णय लेकर, जीवन सुखमय बनाना है।
नव दम्पत्ति एक-दूजे को समझें, फिर भविष्य की नींव सजाएँ ,
बच्चे हों तब ही घर में जब, संग में दोनों तैयार हो जाएँ ।
कम बच्चे होंगे घर में तो, खुशियों का संसार बनेगा,
स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसर का सबको समान अधिकार मिलेगा।
छोटा परिवार, खुशहाल परिवार – यही सबको बतलाना है,
नए ज़माने की नई जरूरत, सबको इसमें ढल जाना है।
- जियालाल, मास्टर ट्रेनर, बाराबंकी

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बलरामपुर
उम्मीद दर्पण
मालती देवी,
परिवार नियोजन लाभार्थी, बलरामपुर
झलक | लिंग भेद को चुनौती देते हुए मालती का परिवार नियोजन अपनाने का निर्णय
यह कहानी है 25 वर्षीय मालती दे वी की, जो बलरामपुर ज़िले के गैंदास बुज़ुर्ग ब्लॉक के हुसैनाबाग़ गाँ व की निवासी हैं। मालती का पहला विवाह मात्र 18 वर्ष की आयु में
हुआ, लेकिन वह रिश्ता अधिक समय तक नहीं चला।
इसके बाद 20 वर्ष की उम्र में उनका दूसरा विवाह धर्मप्रकाश से हुआ, जिनकी पहली पत्नी का निधन हो चुका था और उनके दो बेटे (उम्र 8 वर्ष और 5 वर्ष) थे। विवाह के कु छ
समय बाद, वर्ष 2024 में मालती ने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म के एक साल बाद ही समाज की ओर से उन पर बेटे को जन्म दे ने का दबाव बढ़ने लगा। इसी बीच
गाँ व की आशा कार्यकर्ता नीलम, जो हाल ही में उम्मीद परियोजना के अंतर्गत परिवार नियोजन पर प्रशिक्षित हुई थीं, मालती से मिलीं और उसे समझाया कि वह पहले से ही
तीन बच्चों—जिनमें दो बेटे भी शामिल हैं—की माँ हैं और इन बच्चों के भावनात्मक, शारीरिक और आर्थिक भविष्य की ज़िम्मेदारी अब उसकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
नीलम ने धर्मप्रकाश को यह भी समझाया कि तीन बच्चों से अधिक बच्चों की परवरिश करने में उनके परिवार पर आर्थिक दबाव पड़े गा। दोनों, मालती दे वी और उनके पति ने
इस बात पर विचार किया और परिवार नियोजन विधि - महिला नसबंदी - अपनाने का निर्णय लिया। चूँकि सीएचसी गैंदास बुज़ुर्ग में यह सेवा उपलब्ध नहीं थी, इसलिए 18
जुलाई 2025 को उन्हें बलरामपुर के ज़िला महिला अस्पताल में महिला नसबंदी सेवाएं दिलाई गईं ।
मेरा परिवार अब पूरा है। अब मैं उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और
उज्ज्वल भविष्य देने पर ध्यान कें द्रित कर सकती हूँ।
- मालती देवी
विशेष | ट्रेनिंग से ट्रांसफॉर्मेशन तक
परिवार नियोजन कार्यक्रम में, अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों की तरह, के वल एक बार का प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं होता। समय-समय पर आयोजित प्रशिक्षण न के वल
नई जानकारी और कौशल प्रदान करते हैं, बल्कि विधियों से संबंधित दिशानिर्देशों की समझ को भी सुदृढ़ करते हैं। लंबे समय से परिवार नियोजन की विधियों
और परामर्श कौशल पर कें द्रित एक दिवसीय समर्पित प्रशिक्षण की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिसे उम्मीद परियोजना ने सफलतापूर्वक पूरा किया।
डॉ. मुके श कु मार रस्तोगी,
मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बालरामपुर
पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया ने मोबियस फाउं डे शन के सहयोग से इस प्रशिक्षण को व्यवस्थित रणनीति के तहत लागू किया। प्रशिक्षण को इं टरै क्टिव,
के स-स्टडी आधारित और सहभागितापूर्ण बनाया गया, जिससे यह प्रतिभागियों के लिए अधिक उपयोगी और रोचक रहा। जॉब एड् स के उपयोग ने आशा,
ए.एन.एम. और काउं सलरों को विधियों की जानकारी और परामर्श कौशल को मजबूत करने में मदद की।
इस पहल से हमारे फ्रं टलाइन वर्क र्स और स्वास्थ्य सेवाप्रदाताओं का आत्मविश्वास बढ़ा है व उनमे नई ऊर्जा आई है। वे अब समुदाय को परिवार नियोजन सेवाओं के महत्व से अवगत कराने के साथ-साथ सही जानकारी और परामर्श
भी प्रदान कर रहे हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी लाभार्थी स्वास्थ्य कें द्र पर आने के बाद परामर्श से वंचित न रहे, सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्रों के सभी स्टाफ और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया
गया है।
प्रशासनिक स्तर पर भी सुधार किए गए हैं - फार्मासिस्ट् स को स्टॉक प्रबंधन में मार्गदर्शन दिया गया है और उत्कृ ष्ट कार्य करने वालों को ज़िला स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। इन प्रयासों से सेवाओं की गुणवत्ता और समुदाय
का भरोसा, दोनों सुदृढ़ हुए हैं। मैं इस पहल के लिए पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया और मोबियस फाउं डे शन को धन्यवाद दे ता हूँ।
विशेष |स्वस्थ समाज के लिए युवाओं में यौन एवं प्रजनन
अधिकारों की जागरूकता आवश्यक
मैं बलरामपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र, उतरौला का मुख्य चिकित्सा अधीक्षक हूँ।
प्रतिदिन किशोर-किशोरी और युवा—कभी किसी रोग के कारण, कभी किसी शंका के कारण,
और कई बार मार्गदर्शन के लिए मेरे पास आते हैं । इन अनुभवों से मुझे लगता है कि युवाओं के
लिए अपने यौन एवं प्रजनन अधिकारों को जानना के वल स्वास्थ्य का ही नहीं, बल्कि सामाजिक
न्याय और समानता का भी मुद्दा है।
गाँ वों और कस्बों में अधिकांश किशोर-किशोरियों के पास—मासिक धर्म, गर्भनिरोधक उपाय, यौन संचारित रोग और सुरक्षित गर्भपात
के बारे में सही जानकारी नहीं है। स्कू लों और महाविद्यालयों में यौन शिक्षा वर्जित विषय है, और अभिभावक व समाज इस पर खुलकर
चर्चा नहीं करते। परिणामस्वरूप युवा गलत स्रोतों से जानकारी लेते हैं। इं टरनेट किशोर-किशोरियों के लिए जानकारी का बड़ा स्रोत है,
लेकिन इसके अपने खतरे भी हैं। गलत वेबसाइट या सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएँ मिलने से उनके भ्रमित होने की संभावना
रहती हैं। साथ ही, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण, निजी जानकारी का दुरुपयोग और अनुचित सामग्री तक पहुँच जैसी समस्याएँ
भी बढ़ती हैं।
डॉ. सी. पी. सिंह,
अधीक्षक, उतरौला, बलरामपुर
एक स्वास्थ्यकर्मी के रूप में मेरा मानना है कि खुला संवाद, वैज्ञानिक जानकारी और संवेदनशील परामर्श ही युवाओं को सुरक्षित निर्णय लेने में सक्षम बना सकता है। सरकारी योजनाएँ हैं, लेकिन शर्म, संकोच और सामाजिक
दबाव के कारण उनकी पहुँच सीमित है। हमें गोपनीय, संवेदनशील और मित्रवत स्वास्थ्य सेवाएँ विकसित करनी होंगी।
किशोरों को सही ज्ञान और सुरक्षित सेवाएँ दे ने का दायित्व के वल स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि परिवार, स्कू ल एवं पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इससे वे न के वल स्वस्थ रहेंगे, बल्कि आत्मविश्वास से भरे जिम्मेदार
नागरिक भी बनेंगे। मैं सरकार, पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया और मोबियस फाउं डे शन से अनुरोध करता हूँ कि वे किशोरों के लिए यौन और प्रजनन स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों का संचालन करें ।
रिपोर्ट |आर्थिक सशक्तिकरण
के साथ स्वास्थ्य पर संवाद
महिलाओं को और आत्मनिर्भर
बनाएगा
समूह सखी अपने विचार
साझा करती हुई
उम्मीद परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़े स्टाफ—समूह सखी, आजीविका सखी, बैंक सखी एवं फ्रं टलाइन वर्क र्स (FLW)—के लिए परिवार नियोजन पर उन्मुखीकरण कार्यक्रम 23 सितम्बर
2025 को गैंदास बुज़ुर्ग ब्लॉक, बलरामपुर में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कु ल 61 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसका उद्दे श्य NRLM कर्मियों को परिवार नियोजन सेवाओं की मांग एवं उपयोग बढ़ाने में उनकी भूमिका पर बल
दे ना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री संजय सिंह, खंड विकास अधिकारी (BDO), गैंदास बुज़ुर्ग ने की। इस अवसर पर सहायक विकास आधिकारी (पंचायती राज), ब्लॉक मिशन मैनेजर (NRLM) और ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर
(BCPM) भी मौजूद रहे।
समुदाय में एनआरएलएम कर्मियों की गहरी पहुँच और प्रभाव को ध्यान में रखते हुए बाल विवाह की रोकथाम, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दे ने और पुरुषों की सक्रिय भागीदारी जैसे मुद्दों पर भी जागरूकता फै लाने में उनकी महत्वपूर्ण
भूमिका रे खांकित की गई। BDO श्री संजय सिंह ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि वे आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ महिलाओं के स्वास्थ्य और परिवार नियोजन पर भी चर्चा करें गी, तो महिलाएं और अधिक
आत्मनिर्भर और सशक्त बनेंगी।

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उन्नाव
उम्मीद दर्पण
मंजू ,
परिवार नियोजन लाभार्थी, उन्नाव
झलक | स्वास्थ्य के लिए सही निर्णय ने किया भविष्य सुरक्षित
उन्नाव ज़िले के बिछिया ब्लॉक के कु रारी कला गाँ व में रहने वाली 22 वर्षीय मंजू की कहानी, किशोरावस्था में हुए विवाह और सीमित जानकारी के कारण परिवार
नियोजन में आने वाली चुनौतियों को उजागर करती है। 16 वर्ष की उम्र में पृथ्वी पाल से विवाह के बाद, मात्र चार साल में वह दो बच्चों की माँ बन चुकी थी। पृथ्वी
पाल मज़दूरी करते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति कमज़ोर है।
अप्रैल 2024 में दूसरे बच्चे के जन्म के बाद गाँ व की आशा मिथिलेश ने मंजू को परिवार नियोजन अपनाने की सलाह दी, लेकिन मंजू ने यह कहते हुए मना कर दिया
कि उसका पति बाहर काम करता है और गर्भनिरोध की ज़रूरत नहीं है। उसी साल वह दो बार गर्भवती हुई और दोनों बार गर्भपात कराना पड़ा। दो अन्य बार उसे
आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियाँ लेनी पड़ीं। बार-बार हुए इन अनचाहे गर्भधारणों ने उसे शारीरिक रूप से कमज़ोर और मानसिक रूप से थका दिया।
फरवरी 2025 में मिथिलेश के दोबारा समझाने पर मंजू ने परिवार नियोजन की बात गंभीरता से ली। मिथिलेश ने उसे परिवार नियोजन साधनों के बारे में बताया और
उपकें द्र चलने को प्रेरित किया। मार्च 2025 में मंजू मिथिलेश के साथ बिछिया उपकें द्र पहुँची, जहाँ सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) रूबी ने उसे सभी अंतराल
और स्थायी विधियों की विस्तृत जानकारी दी। CHO रूबी द्वारा परामर्श मिलने से मंजू का आत्मविश्वास बढ़ा और उसने सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र बिछिया पर जा कर
अंतरा की पहली खुराक ली।
अब मुझे सुकू न है कि मैंने सही फै सला लिया। परिवार नियोजन
अपनाकर मैं निश्चिंत हूँ और अपनी सेहत व बच्चों पर ध्यान दे पा रही हूँ।
- मंजू
विशेष | परिवार नियोजन में पुरुषों की ज़िम्मेदारी
एवम् सहभागिता महत्वपूर्ण
डा. हरिनन्दन प्रसाद, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी
रिप्रोडक्टिव ऐंड चाइल्ड हेल्थ (RCH) एवं जनपदीय
नोडल अधिकारी परिवार नियोजन, उन्नाव
परिवार नियोजन के वल
जनसंख्या नियंत्रण का माध्यम
नहीं, बल्कि हर परिवार के बेहतर
स्वास्थ्य और भविष्य की कुं जी है। इसे
पुरुषों और महिलाओं की साझा
जिम्मेदारी के रूप में दे खना आवश्यक
है। उन्नाव के अपर मुख्य चिकित्सा
अधिकारी के रूप में मेरा मानना है कि
यदि पुरुष सक्रिय रूप से परिवार
नियोजन अपनाएँ , तो हम सुरक्षित
मातृत्व, स्वस्थ परिवार और संतुलित
जनसंख्या की दिशा में बड़ा कदम उठा
सकते हैं।
आज भी परिवार नियोजन के साधनों का उपयोग अधिकतर महिलाएँ ही करती हैं, जबकि पुरुषों
की भागीदारी सीमित है। बच्चे के जन्म और पालन-पोषण का भार महिलाओं पर होता है, इसलिए
यह उनका अधिकार है कि वे तय करें कब, कितने व कितने अंतराल पर बच्चे हों। पुरुषों की
जिम्मेदारी है कि वे इस निर्णय में अपनी पत्नी का सहयोग करें - चाहे भावनात्मक समर्थन दे कर या
स्वयं परिवार नियोजन विधि अपनाकर।
विशेष | साझा प्रयासों से बढ़ेगी परिवार नियोजन
पर जन जागरूकता
परिवार नियोजन के वल स्वास्थ्य विभाग की ही ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह ऐसा क्षेत्र है जहाँ कई
विभाग मिलकर काम करें तो परिणाम अधिक प्रभावी और स्थायी हो सकते हैं ।
महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनवाड़ी कें द्रों और किशोर-किशोरी समूहों के माध्यम से महिलाओं को
परिवार नियोजन, जन्म अंतराल, सुरक्षित मातृत्व और पोषण के महत्व पर जागरूक कर सकता है तथा
सेवाओं के प्रचार और वितरण में सहयोग दे सकता है।
पंचायती राज विभाग, ग्राम पंचायत स्तर पर परिवार नियोजन को चर्चा का विषय बनाकर, ग्राम स्वास्थ्य
एवं पोषण दिवस (VHND) के दौरान इसकी सेवाएँ उपलब्ध करा सकता है। ग्राम प्रधान ग्राम स्वास्थ,
स्वच्छता एवं पोषण समिति के फं ड का उपयोग गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए कर सकते हैं और
आशा-ए.एन.एम.को परिवार नियोजन पर सक्रिय रूप से काम करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। ग्राम
सभाओं के माध्यम से पुरुष सहभागिता को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
युवा एवं खेल विभाग और नेहरू युवा कें द्र युवाओं में सकारात्मक सोच
विकसित कर उन्हें परिवार नियोजन के लिए परिवर्तन के वाहक बना
सकते हैं। युवा चैंपियंस के माध्यम से युवाओं को जोड़कर प्रेरित किया
जा सकता है, ताकि वे पुरुष भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए परिवर्तन
के वाहक बनें और समाज को नई दिशा प्रदान करें ।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएँ अपने समुदाय में,
समाज में प्रचलित कु रीतियों जैसे बाल विवाह, बेटे की चाह जैसी
कु रीतियों के खिलाफ जागरूकता फै लाकर लिंग समानता और बच्चों के
बीच उचित अंतराल पर चर्चा को प्रोत्साहित कर सकती हैं।
डॉ संतोष कु मार श्रीवास्तव,
खण्ड विकास अधिकारी, उन्नाव
कं डोम का नियमित प्रयोग या नसबंदी जैसे उपाय पुरुषों की जिम्मेदारी साझा करने के प्रभावी
साधन हैं। जब पुरुष सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो न के वल दांपत्य संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि
परिवार और समाज दोनों अधिक स्वस्थ और खुशहाल बनते हैं।
इस प्रकार सभी विभाग साझा दृष्टिकोण से आगे बढ़कर परिवार नियोजन का लाभ समाज के हर
वर्ग तक पहुँचा सकते हैं।
रिपोर्ट |परिवार नियोजन में पुरुषों की भूमिका पर ज़ोर
पुरुषों की परिवार नियोजन में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्दे श्य से पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ इं डिया द्वारा
‘उम्मीद परियोजना’ के तहत 25 सितंबर 2025 को उन्नाव ज़िले के पुरवा ब्लॉक के मिर्रीखेड़ा गांव में एक विशेष बैठक
आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में लगभग 50 पुरुष और महिलाएँ उपस्थित रहे। बैठक के दौरान पुरुषों को परिवार
नियोजन की विभिन्न विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई और उन्हें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। साथ
ही, बाल विवाह, बच्चों में सही अंतराल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जागरूकता फै लायी गई।
बैठक में मोबाइल वैन का उपयोग कर परिवार नियोजन पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई, ऑडियो जिंगल प्रस्तुत किए
गए और हैंडबिल वितरित किए गए। वहीं, वैन में उपस्थित प्रशिक्षित काउं सलर ने लाभार्थियों को परिवार नियोजन के साधन
भी उपलब्ध कराए।
मिर्रीखेड़ा गांव में पुरुषों को परिवार नियोजन की विभिन्न विधियों के बारे में
विस्तार से जानकारी दी गई और उन्हें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया
इस बैठक में ग्राम प्रधान श्रीमती कान्ति दे वी, प्रधान प्रतिनिधि श्री जगभान सिंह, ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर इशहाक
अली, ए.एन.एम., आशा संगिनी और आशा कार्यकर्ता सहित मीडिया प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। ग्राम प्रधान ने पुरुषों से
अपील की कि वे परिवार नियोजन अपनाकर अपने परिवार का आकार सीमित रखें और खुशहाल जीवन सुनिश्चित करें ।
रचना|परिवार नियोजन: स्वस्थ्य जीवन की राह
छोटा परिवार, सुखी परिवार,
स्वस्थ जीवन का यही आधार।
अस्थायी उपाय हैं आसान सहारा,
कं डोम, गोली, कॉपर-टी प्यारा।
ज़रूरत के अनुसार इन्हें अपनाएँ ,
सुरक्षित रहकर मुस्कान फै लाएँ ।
स्थायी उपाय, जब मन हो अटल,
नसबंदी से भविष्य होगा सफल।
जीवन होगा निश्चिंत और हल्का,
सपनों का आँ गन होगा दमका।
आशा बहन घर-घर जाएँ ,
ज्ञान और परामर्श सब तक पहुँचाएँ ।
माँ -बच्चे की सेहत सँभाले,
हर परिवार को जागरूक बनाएं ।
स्वास्थ्य विभाग निभाता योगदान,
लाता है नित नए अभियान।
जागरूकता से बढ़े विश्वास,
हर आँ गन में खिले विकास।
इशहाक अली,
ब्लॉक कम्यूनिटी प्रोसेस
मैनेजर, नवाबगंज, उन्नाव
रचना|नहीं जनूँगी लाल
आधा दर्जन बच्चे तेरे , एक चौथाई लाल,
रो कर बच्चे रोटी मांगे और वो मांगे दाल ।
सुन कर मम्मी सोच में डूबी, कै से कटेंगें साल ?
हाय रे दइया का करू मैं फं दा है ये जाल।
गर्भ निरोधक गोली खाऊँ , या कॉपर टी का इस्तेमाल,
या नसबंदी करा लूँ जल्दी, हो जाये ख़तम बवाल।
एक दो बच्चे घर में रहते, घर होता खुशहाल,
रबड़ी मलाई जी भर कर खाते, रहते मालामाल।
रे बाबा अब और नहीं जनूँगी लाल
रे बाबा अब और नहीं जनूँगी लाल
श्रीमती, आशा,
नवाबगंज,
उन्नाव

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श्री सौरभ पांडेय
सहायक शोध अधिकारी (ARO), गोंडा
गोंडा
उम्मीद दर्पण
रिपोर्ट | युवा अधिकारी की पहल से मनकापुर सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र में स्वास्थ्य सेवाएँ
हुई सशक्त
अगस्त 2024 में जब 28 वर्षीय श्री सौरभ पांडे य ने मनकापुर , गोंडा के सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र (CHC) में सहायक शोध अधिकारी (ARO) के रूप में
कार्यभार संभाला, तो वे नए थे, लेकिन सीखने और योगदान दे ने की उत्सुकता प्रबल थी। ज़िला स्तरीय डे टा वैलिडे शन कमेटी की बैठकों और स्वास्थ्य
प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) के विश्लेषण से उन्होंने परिवार नियोजन परामर्श और डे टा-आधारित निर्णय लेने का महत्व समझा।
दिसंबर 2024 में उन्होंने पॉपुलेशन फ़ाउं डे शन ऑफ़ इं डिया द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (ToT) में भाग लिया, जहाँ उन्होंने
परिवार नियोजन पर प्रशिक्षण प्राप्त किया और ए.एन.एम. व आशाओं की चुनौतियों को नज़दीक से जाना। इसके बाद सौरभ ने ब्लॉक स्तर पर छह बैचों में
189 आशाओं और 38 ए.एन.एम. को प्रशिक्षित किया तथा नियमित क्लस्टर बैठकों में परिवार नियोजन पर चर्चा को शामिल किया।
मार्च 2025 में उन्होंने रोगी कल्याण समिति (RKS) के फं ड से एक कमरे की मरम्मत व पुताई करवा कर परिवार नियोजन परामर्श कें द्र (FPCC)
स्थापित करवाया, जिससे दंपत्तियों को अब गोपनीय और सहज वातावरण में परामर्श मिलना शुरू हुआ। नवंबर 2024 से अगस्त 2025 के बीच लगभग
529 लाभार्थियों को इस कें द्र पर परामर्श मिला, जिससे सेवाओं का उपयोग बढ़ा।
CHC अधीक्षक डॉ. एस. एन. सिंह ने कहा, “सौरभ ने उम्मीद परियोजना के प्रशिक्षण के बाद अपने कार्य में उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है।”
मनकापुर से होने के कारण यहाँ की सेवाओं को बेहतर बनाना मैं अपनी जिम्मेदारी
मानता हूँ और चाहता हूँ कि हमारा ब्लॉक दूसरों के लिए एक मॉडल बने।
- सौरभ पांडेय
श्री राहुल पटेल
मंडलीय प्रोजेक्ट मैनेजर ,
सिफ्सा/ NHM देवीपाटन मण्डल
(फ़ोटो में दाईं ओर)
बातचीत | परिवार नियोजन लॉजिस्टिक्स प्रबंधन सूचना प्रणाली:
परिवार नियोजन सेवाओं में पारदर्शिता और दक्षता की दिशा में
कदम - श्री राहुल पटेल
1. FPLMIS क्या है? परिवार नियोजन के क्षेत्र में इसका क्या महत्त्व है?
परिवार नियोजन लॉजिस्टिक्स प्रबंधन सूचना प्रणाली (FPLMIS), एक वेब-आधारित और मोबाइल
ऐप प्रणाली है, जिसे भारत सरकार ने परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत विकसित किया है। इसका
उद्दे श्य परिवार नियोजन सामग्रियों की सप्लाई चेन को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।इस
सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्वास्थ्य इकाइयों से लेकर आशा कार्यकर्ताओं तक परिवार नियोजन की
सामग्री के स्टॉक और खपत की रीयल-टाइम जानकारी उपलब्ध होती है। मोबाइल ऐप से आशा स्वयं
स्टॉक रिपोर्टिंग और मांग ऑनलाइन कर सकती हैं, जिससे गर्भनिरोधक साधन समय पर उपलब्ध होते
हैं और दंपत्तियों को परिवार नियोजन सेवाएँ बिना रुकावट मिलती हैं।
2. गोंडा ज़िले में FPLMIS के कार्यान्वयन में क्या चुनौतियाँ रही हैं?
आशा स्तर पर डिजिटल साक्षरता की कमी FPLMIS के कार्यान्वयन की एक बड़ी चुनौती है। डाटा की
गुणवत्ता, समय पर प्रविष्टि और स्टॉक रिपोर्टिंग से जुड़ी समस्याएँ भी हैं। अधूरी या विलंबित प्रविष्टियाँ
और समुदाय स्तर पर वास्तविक समय के स्टॉक अपडे ट की कमी के कारण माँ ग और उपलब्धता में
अक्सर असमानता हो जाती है, जिससे स्थानीय स्तर पर स्टॉकआउट की स्थिति पैदा हो जाती है ।
3. इन चुनौतियों को किस प्रकार दूर किया जा सकता है?
साल में दो बार जनपद एवं ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित किया जाना चाहिए, जिसमें आशाओं को
सही यूनिट दर्ज करने और स्टॉक रजिस्टर सही तरीके से भरने की प्रक्रिया सिखाई जाए। साथ ही,
ब्लॉक बैठकों में स्टॉक एवं खपत पर आधारित फीडबैक शीट भी साझा की जानी चाहिए।
हमारे अनुरोध पर पॉपुलेशन फ़ाउं डे शन ऑफ़ इं डिया द्वारा आयोजित जिला-स्तरीय FPLMIS प्रशिक्षण
अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। इस प्रशिक्षण में स्टॉक एंट्री, इं डें ट भरने और रिपोर्ट दे खने की प्रक्रिया को
सरल एवं व्यावहारिक रूप में समझाया गया। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल पर अभ्यास से आशाओं की
क्षमता में वृद्धि हुई, जिससे समय पर रिपोर्टिंग और बेहतर स्टॉक प्रबंधन सुनिश्चित हो सका है।
विशेष | सशक्त नारी, स्वस्थ परिवार:
स्वयं सहायता समूह (SHG)
महिलाओं व किशोरियों के साथ परिवार
नियोजन की पहल
श्री दिनेश चंद्र
सहायक विकास अधिकारी (ADO), करनैलगंज, गोंडा
महिलाओं के सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के
तहत गठित स्वयं सहायता समूह (SHG) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनका उद्दे श्य न के वल महिलाओं
को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना
भी है। जब इन समूहों की महिलाओं को स्वास्थ्य और परिवार नियोजन की जानकारी दी जाती है, तो इसके
सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी कई सकारात्मक प्रभाव सामने आते हैं।
इसी उद्दे श्य से उम्मीद परियोजना के तहत गत वर्ष गोंडा जनपद में कई अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित
किए गए। 11 नवम्बर 2024 को कटरा बाजार ब्लॉक (45 प्रतिभागी), 7 मई 2025 को छपिया ब्लॉक
(65 प्रतिभागी) और 5 जून 2025 को कर्नलगंज ब्लॉक (60 प्रतिभागी) में SHG महिलाओं के लिए सत्र
आयोजित हुए, जिनकी अध्यक्षता ब्लॉक विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी एवं चिकित्सकों द्वारा
की गई।
इन सत्रों में पॉपुलेशन फ़ाउं डे शन ऑफ़ इं डिया की टीम और स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को
गर्भनिरोधक उपायों, उनके फायदे , सुरक्षित उपयोग और परामर्श सेवाओं की जानकारी दी। साथ ही यह भी
बताया गया कि SHG सदस्य अपने अनुभव और ज्ञान को समुदाय में साझा कर परिवार नियोजन सेवाओं की
पहुँच बढ़ाने, तथा लिंग आधारित भेदभाव और हिंसा जैसी कु रीतियों को मिटाने में अहम भूमिका निभा सकती
हैं ।
इसी क्रम में, मनकापुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) में भी 45 छात्राओं के लिए सत्र
आयोजित किया गया, जिसमें स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और मासिक धर्म प्रबंधन से संबंधित जानकारी दी
गई। SHG महिलाओं व किशोरियों को परिवार नियोजन प्रशिक्षण दे ना न के वल उनके व्यक्तिगत
सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समुदाय और राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी
लाभकारी है।
डॉ. आदित्य वर्मा,
अपर मुख्य चिकित्सा
अधिकारी, गोंडा
विशेष|रोगी कल्याण समिति (RKS) प्रशिक्षण: स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और
सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम - अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गोंडा
रोगी कल्याण समिति की संरचना, उद्देश्य और कार्यप्रणाली को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों के कई सवाल होते हैं जिसके कारण संसाधनों के उपयोग संबंधी
निर्णय लेने में विलंब होता है या उनका उपयोग प्रभावी ढंग से नहीं हो पाता है। अतः समिति के सदस्यों को वित्तीय प्रबंधन व पारदर्शिता पर पर्याप्त
जानकारी एवं प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
इस संबंध में पॉपुलेशन फाउं डे शन ऑफ़ इंडिया द्वारा आयोजित रोगी कल्याण समिति प्रशिक्षण एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल रही। इस प्रशिक्षण में समिति की भूमिका, उसके क्रियान्वयन तथा
निर्णय लेने की प्रक्रिया और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को संबोधित किया गया।
प्रशिक्षण की सामग्री प्रासंगिक, व्यावहारिक और स्वास्थ्य कें द्र स्तर पर रोगी कल्याण समिति को सुदृढ़ करने और रोगी-हितैषी सेवाओं को सुनिश्चित करने के उद्देश्यों के अनुरूप थी। मैं
आश्वासन देता हूँ कि भविष्य में भी इस परियोजना की गतिविधियों के लिए मेरे द्वारा पूर्ण समर्थन प्रदान किया जाएगा।

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श्रावस्ती
उम्मीद दर्पण
कलावती,
आशा, श्रावस्ती
झलक |आशा कलावती द्वारा परिवार नियोजन में पुरुष सहभागिता की पहल
कलावती, 35 वर्षीय आशा कार्यकर्ता हैं, जो श्रावस्ती ज़िले के सिरसिया ब्लॉक के पिपरी गाँ व की रहने वाली हैं और 2007 से आशा के रूप में कार्य कर
रही हैं। उनके समुदाय में गहरी धार्मिक मान्यतओं के चलते परिवार नियोजन पर बातचीत सीमित है, विशेषकर पुरुषों के बीच।
मई 2025 में उम्मीद परियोजना से प्रशिक्षण और साप्ताहिक क्लस्टर मीटिंग्स में मिले मार्गदर्शन ने कलावती को नई समझ और आत्मविश्वास दिया। इस
प्रशिक्षण ने न के वल उन्हें परिवार नियोजन के तरीकों का गहन ज्ञान दिया, बल्कि पुरुषों को परामर्श करने की क्षमता भी विकसित की, जो अक्सर प्रमुख
निर्णयकर्ता होते हैं। कलावती की एक लाभार्थी हैं 27 वर्षीय अफ़साना, जो दो बेटियों की माँ हैं। जुलाई 2025 में दूसरी गर्भावस्था के दौरान गृह भ्रमण
पर कलावती समझ गईं कि के वल अफ़साना से बातचीत पर्याप्त नहीं होगी। अफ़साना कम उम्र में विवाह कर संयुक्त परिवार में रहती थी, जहाँ निर्णय
उसके पति नुरुल्लाह और ससुर सनिउल्लाह लेते थे। ऐसे माहौल में परिवार नियोजन पर चर्चा करना कठिन था। इसलिए कलावती ने दोनों पुरुषों को भी
परामर्श में शामिल किया और बार-बार गर्भधारण से अफसाना के स्वास्थ्य एवं परिवार की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकू ल प्रभाव के बारे में समझाया।
उन्होंने पोस्टपारटम इं ट्रायूटेरिन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (PPIUCD) और अंतरा
जैसी स्पेसिंग विधियों के बारे में विस्तार से समझाया। शुरुआत में परिवार ने
दिलचस्पी नहीं दिखाई, अंततः, 10 सितम्बर 2025 को जब अफ़साना ने दूसरी
बेटी को जन्म दिया, कलावती ने अस्पताल में फिर से पति और ससुर से बातचीत
की और उनके समर्थन से, अफ़साना ने PPIUCD को परिवार नियोजन की
विधि के रूप में अपनाया।
अपने 20 वर्षों के अनुभव में यह पहला अवसर था
जब मैंने परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए
परिवार के पुरुषों को शामिल किया। इससे बहुत
मदद मिली। अब मैं आगे भी पुरुषों को अधिक से
अधिक शामिल करने की कोशिश करूँ गी।
- कलावती, आशा
बातचीत | प्रशिक्षण ने मुझे नई दिशा दी, अब कार्यकर्ताओं को प्रेरित कर पा रहा हूँ -
श्री प्रतीक शाक्य
1.आप उम्मीद परियोजना से कब से जुड़ें हैं?
मैं उम्मीद परियोजना से दिसम्बर 2024 से जुड़ा हूँ, इसके पश्चात ही मुझे मुख्य चिकित्सा अधिकारी महोदय द्वारा परिवार नियोजन
कार्यक्रम का नोडल अधिकारी बनाया गया।
2.आपने अब तक उम्मीद परियोजना के अंतर्गत कौन कौन से प्रशिक्षण प्राप्त किये और क्या नया सीखा?
जुलाई 2025 में राज्य स्तर पर आयोजित परामर्शदाताओं के प्रशिक्षक प्रशिक्षण और अगस्त 2025 में आशा व ए.एन.एम. के
प्रशिक्षण हेतु हुए प्रशिक्षक प्रशिक्षण में मैंने भाग लिया। पहले मेरी ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम तक सीमित थी, पर इस
प्रशिक्षण के बाद परिवार नियोजन कार्यक्रम और उसकी विधियों की बेहतर समझ विकसित हुई, जिससे अब मैं कार्यक्रम को अधिक
प्रभावी रूप से संचालित कर पा रहा हूँ।
3.आपने अपने जनपद में परिवार नियोजन कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए कौन कौन से कदम उठायें है?
मैंने ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्यकर्मियों को सभी परिवार नियोजन विधियों - जैसे अंतरा, छाया, IUCD, PPIUCD आदि - और परिवार
नियोजन परामर्श कें द्रों के उपयोग को बढ़ावा दे ने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया है। साथ ही आशा औरए.एन.एम. की क्षमता
वर्धन पर ध्यान दिया जा रहा है। FPLMIS पोर्टल की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है तथा फ्रं टलाइन वर्क र्स की निगरानी और
समन्वय के लिए एक व्हाट् सएप समूह भी बनाया गया है।
4.आपके इन कदमों से क्या सकारात्मक बदलाव आया है?
इन सभी प्रयासों के कारण जनपद की उपलब्धि बढ़ी है। जहां पिछले सालों में गर्मी के माह में नसबंदी नहीं हुआ करती थी, वहीं इस
साल अप्रैल से अगस्त 2025 तक कु ल 80 महिला नसबंदी तथा 04 पुरुष नसबंदी हुई है। साथ ही FPLMIS पोर्टल पर 90%
तक इं डें ट हुआ है, जो पिछले साल तक (अप्रैल, 2025 से पहले) 10%-20% तक ही होता था। इन आंकड़ों से स्पष्ट है की
परिवार नियोजन कार्यक्रम में निरं तर प्रगति दर्ज की जा रही है।
प्रशिक्षण के उपरांत पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया से
शिल्पा नायर (राज्य प्रमुख) एवं मोबियस फाउंडेशन के
प्रतिनिधि प्रभात से सर्टिफ़िके ट प्राप्त करते हुए श्री प्रतीक
शाक्य, डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (DEIC) प्रबंधक,
श्रावस्ती (फ़ोटो में बाईं ओर)
रचना|परिवार नियोजन पर जागरूकता हेतु निधि पाठक
द्वारा बनाया गया पोस्टर
निधि पाठक,
कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, ब्लॉक
हरिहरपुर रानी, श्रावस्ती
रचना|जनसंख्या स्थिरीकरण: उज्ज्वल भविष्य की नींव
जब जनसंख्या बढ़ती जाती है, संसाधन होते जाते कम,
सोच-समझकर आगे बढ़ना ही है सबसे बड़ा कदम।
छोटा परिवार ही है खुशहाल जीवन की पहचान,
कम बच्चों से ही पूरे होते सब के हर अरमान।
धरती भी तभी मुस्काएगी जब इसका बोझ घटेगा,
नियंत्रित होती जनसंख्या से, सुख का दीप जलेगा ।
शिक्षा, समझ और जागरूकता—यही है असली हथियार,
परिवार नियोजन को अपनाएँ , बदलता है ये घर संसार ।
आज लिया फै सला समझदारी का, कल का जीवन सजाएगा,
सुख, स्वास्थ्य, और समृद्धि, छोटा परिवार ही लेकर आयेगा ।
डॉ विनय कु मार श्रीवास्तव,
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी,
श्रावस्ती